8th Pay Commission – केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। खबरों के मुताबिक 10 मार्च को होने वाली बैठक में वेतन संरचना, फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम सैलरी को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। खास बात यह है कि इस बार केवल अधिकारियों ही नहीं बल्कि चपरासी और ग्रुप-डी कर्मचारियों की सैलरी में भी भारी इजाफे की उम्मीद जताई जा रही है। यदि आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो बेसिक वेतन, महंगाई भत्ता और अन्य भत्तों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और बाजार में भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
क्या है 8वें वेतन आयोग का मुख्य प्रस्ताव?
8वें वेतन आयोग का उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन संरचना को वर्तमान महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप संशोधित करना है। सूत्रों के अनुसार फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.0 या उससे अधिक करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल संभव है। फिलहाल न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 26,000 से 30,000 रुपये तक किया जा सकता है। इसके अलावा हाउस रेंट अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल सुविधाओं में भी संशोधन की चर्चा है। आयोग की सिफारिशें लागू होने पर निचले स्तर के कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की संभावना है।
चपरासी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को कितना लाभ?
इस बार 8वें वेतन आयोग में खास फोकस निचले वेतनमान वाले कर्मचारियों पर बताया जा रहा है। चपरासी, मल्टी टास्किंग स्टाफ और अन्य ग्रुप-डी कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा संभव है। यदि न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये से ऊपर जाता है तो इन कर्मचारियों की मासिक आय में सीधा 8,000 से 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही डीए और अन्य भत्तों के जुड़ने से कुल सैलरी और अधिक बढ़ेगी। इससे निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उनकी क्रय शक्ति में सुधार होगा। लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला ऐतिहासिक साबित हो सकता है।
10 मार्च की बैठक क्यों है अहम?
10 मार्च को होने वाली बैठक को निर्णायक माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन आयोग की सिफारिशों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। सरकार इस बैठक में वित्तीय भार, बजट प्रावधान और कर्मचारियों की मांगों पर विस्तार से चर्चा कर सकती है। यदि सहमति बनती है तो सिफारिशों को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद लागू होने की तारीख भी तय की जा सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि देरी से लागू होने पर एरियर भी दिया जाना चाहिए। इसलिए यह बैठक लाखों परिवारों के भविष्य से जुड़ी हुई मानी जा रही है।
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लागू होने पर अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
यदि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो इसका असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा। कर्मचारियों की आय बढ़ने से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी। रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में तेजी आ सकती है। हालांकि सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा, जिसे संतुलित करना एक चुनौती होगी। कुल मिलाकर यह फैसला कर्मचारियों के लिए राहत भरा और देश की अर्थव्यवस्था के लिए प्रोत्साहनकारी साबित हो सकता है।









