Gold-Silver Rates: चांदी हाई से अब ₹1.56 लाख सस्ती, सोना 32000 रुपये फिसला, जानें 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट

Gold Silver Rates

Gold Silver Rates – सोना-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव एक बार फिर चर्चा में है। ताजा रुझानों के मुताबिक चांदी अपने हालिया हाई से करीब ₹1.56 लाख तक सस्ती बताई जा रही है, जबकि सोने में भी करीब 32000 रुपये की गिरावट देखी गई है। ऐसे में निवेशक और खरीदार दोनों यही जानना चाहते हैं कि आज 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट कितना चल रहा है और आने वाले दिनों में ट्रेंड किस दिशा में जा सकता है। कीमतों में यह नरमी कई वजहों से आती है जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव, डॉलर में मजबूती, ब्याज दरों की उम्मीदें और घरेलू मांग में बदलाव। शादी-ब्याह और फेस्टिव सीजन में आमतौर पर ज्वेलरी डिमांड बढ़ती है, इसलिए रेट्स पर नजर रखना जरूरी हो जाता है। अगर आप खरीदारी या निवेश की योजना बना रहे हैं, तो रेट के साथ-साथ मेकिंग चार्ज, जीएसटी और शहर के हिसाब से अंतर भी जरूर समझें।

10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट कैसे तय होता है

10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट सिर्फ एक नंबर नहीं होता, इसके पीछे कई फैक्टर काम करते हैं। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की चाल असर डालती है, क्योंकि घरेलू रेट उसी ट्रेंड को फॉलो करते हैं। दूसरा बड़ा कारण डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट है, रुपये के कमजोर होने पर आयात महंगा पड़ता है और कीमत बढ़ सकती है। वहीं ब्याज दरों और महंगाई का अनुमान भी अहम रहता है, क्योंकि निवेशक सुरक्षित विकल्पों में पैसा शिफ्ट करते हैं। इसके अलावा भारत में गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स स्ट्रक्चर रिटेल प्राइस को ऊपर-नीचे करता है। ध्यान रखें कि अलग-अलग शहरों में लोकल डिमांड, ट्रांसपोर्ट और ज्वेलर मार्जिन के कारण थोड़ा अंतर आ सकता है। इसलिए खरीदने से पहले अपने शहर का लेटेस्ट रेट, बिल में शुद्धता, हॉलमार्क और चार्ज का ब्रेकअप जरूर चेक करें ताकि बाद में कोई कन्फ्यूजन न रहे।

चांदी हाई से क्यों फिसली और आगे क्या संकेत हैं

चांदी की कीमत हाई से गिरकर करीब ₹1.56 लाख तक सस्ती होने की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि चांदी में निवेश के साथ-साथ इंडस्ट्रियल डिमांड का रोल बड़ा होता है। जब ग्लोबल ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है या मैन्युफैक्चरिंग डेटा कमजोर रहता है, तो चांदी पर दबाव आ सकता है। दूसरी तरफ, जब तेजी के दौरान बहुत ज्यादा मुनाफावसूली होती है, तो कीमतें तेजी से नीचे आती हैं। सोने की तुलना में चांदी ज्यादा वोलाटाइल मानी जाती है, इसलिए छोटे समय में बड़ी मूवमेंट दिख सकती है। अगर आप चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो एक ही बार में पूरा निवेश करने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रहती है। वहीं ट्रेडिंग करने वालों को सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर नजर रखनी चाहिए। आगे की दिशा काफी हद तक डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और औद्योगिक मांग के संकेतों पर निर्भर करेगी, इसलिए रोजाना अपडेट देखना जरूरी है।

सोना 32000 रुपये फिसला तो खरीदारी का सही समय

सोने में करीब 32000 रुपये की गिरावट का मतलब यह नहीं कि कीमतें अब लगातार नीचे ही जाएंगी, लेकिन यह खरीदारों के लिए एक अवसर जरूर बना सकती है। अगर आपकी जरूरत ज्वेलरी खरीदने की है, तो गिरावट के दौर में रेट लॉक कर लेना फायदेमंद होता है, खासकर जब आगे फेस्टिव या वेडिंग डिमांड बढ़ने की उम्मीद हो। निवेश के लिहाज से भी यह समय काम आ सकता है, पर रणनीति जरूरी है। एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय एसआईपी जैसे तरीके से या अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी करने से औसत कीमत बेहतर बनती है। साथ ही 24 कैरेट और 22 कैरेट के रेट का अंतर समझें, क्योंकि ज्वेलरी आमतौर पर 22 कैरेट में ली जाती है। हमेशा हॉलमार्क, बिल और प्यूरीटी की जांच करें। अगर आप डिजिटल गोल्ड, ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड देख रहे हैं, तो फीस, लॉक-इन और टैक्स नियम भी पहले समझ लेना समझदारी होगी।

आज के रेट चेक करते समय किन बातों का रखें ध्यान

आज के सोना-चांदी रेट चेक करते समय सिर्फ सोशल मीडिया या एक ही सोर्स पर भरोसा न करें। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर दिखने वाला रेट स्पॉट प्राइस, एमसीएक्स, या रिटेल ज्वेलरी प्राइस अलग हो सकता है। रिटेल खरीदारी में मेकिंग चार्ज, स्टोन चार्ज और जीएसटी जुड़ने के बाद अंतिम भुगतान काफी बदल जाता है। इसी तरह, चांदी में भी शुद्धता और फॉर्म जैसे सिक्का, बार या ज्वेलरी के हिसाब से रेट अलग हो सकता है। अगर आप 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट देख रहे हैं, तो यह भी समझें कि 999 फाइन गोल्ड और हॉलमार्किंग की जानकारी क्या है। शहरों के बीच भी अंतर रहता है, इसलिए अपने इलाके के भरोसेमंद ज्वेलर से कन्फर्म करें। निवेशक ट्रेंड समझने के लिए सप्ताह और महीने का चार्ट भी देखें। सबसे जरूरी बात यह है कि खरीदारी का फैसला अफवाहों पर नहीं, बजट, जरूरत और जोखिम क्षमता के हिसाब से लें।

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