Rain Alert – आंधी-बारिश का अलर्ट सुनते ही लोगों की धड़कन तेज हो जाती है, क्योंकि कुछ ही घंटों में मौसम का मिज़ाज पलट सकता है। खबरों के मुताबिक उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के करीब 12 राज्यों में तेज़ हवा, गरज-चमक और भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे सिस्टम में कहीं-कहीं ओलावृष्टि, पेड़ गिरने और जलभराव का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विभाग आमतौर पर येलो, ऑरेंज और रेड जैसे अलर्ट जारी करता है, इसलिए अपने जिले का ताज़ा अपडेट सरकारी ऐप, रेडियो या स्थानीय प्रशासन की सूचना से जरूर मिलान करें। बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ती हैं, इसलिए मोबाइल चार्ज रखें और टॉर्च, पावर बैंक, जरूरी दवाइयां व पीने का पानी साथ में तैयार कर लें। अगर आपके इलाके में चेतावनी है तो छत, खेत, निर्माण स्थल और खुले मैदान से दूरी रखें। घर की ढीली टिन-शीट, गमले, साइनबोर्ड या सोलर पैनल की फिटिंग अभी जांच लें, ताकि तेज़ झोंकों में नुकसान कम हो और परिवार सुरक्षित रहे।
12 राज्यों में मौसम का असर
आंधी-बारिश के साथ सबसे बड़ा खतरा तेज़ झोंके और अचानक गिरने वाली बिजली का होता है। हवा की रफ्तार बढ़ते ही कच्चे मकान, टिन की छतें, होर्डिंग, पेड़ और बिजली के खंभे कमजोर पड़ सकते हैं। कई जगहों पर थोड़ी देर में ही तेज़ बारिश होने से नालियां ओवरफ्लो होती हैं और अंडरपास, बाजार या कॉलोनी के निचले हिस्सों में पानी भर जाता है। अगर ओले पड़ें तो फसलों, वाहन की शीशों और सोलर पैनल को नुकसान पहुंच सकता है। तेज़ गरज-चमक के दौरान विजिबिलिटी घटती है और सड़क पर फिसलन बढ़ जाती है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी रहता है। ऐसे समय में खिड़की-दरवाजे बंद रखें, बालकनी में रखी ढीली चीजें अंदर कर दें और धातु के खंभों या खुले तारों से दूर रहें। किसान भाई खेत में सिंचाई पंप या ट्रैक्टर के पास खड़े न हों, क्योंकि पानी और बिजली का कॉम्बिनेशन जोखिम बढ़ाता है। मौसम शांत होते ही नदी-नालों के पास जाने से बचें और छत, पेड़ों व तारों की हालत देख कर ही बाहर निकलें।
अलर्ट के दौरान क्या तैयारी करें
अगर आपके जिले में अलर्ट है तो सबसे पहले अपने घर का “सेफ प्लान” बना लें। छत पर रखी ईंटें, टंकियों के ढक्कन, एंटीना या सोलर फ्रेम की पकड़ मजबूत करें, ताकि हवा में उड़कर किसी को चोट न लगे। ड्रेनेज साफ रखें और बाल्टी, मग, कपड़े जैसी चीजें ऐसी जगह रखें जहां पानी चढ़ने पर भी मिल जाएं। जरूरी कागज़ात, नकद, चार्जर, फर्स्ट-एड, बच्चों का दूध, और बुजुर्गों की नियमित दवाइयां एक बैग में रख दें। बिजली कटने की स्थिति में इन्वर्टर/टॉर्च काम आएगा, इसलिए बैटरी भी चेक करें। अपने पड़ोसी, खासकर अकेले रहने वाले बुजुर्गों से एक कॉल में हालचाल पूछ लें और जरूरत पड़े तो साथ में शिफ्ट होने की योजना बनाएं। बाहर जाना जरूरी हो तो हेलमेट, रेनकोट और मजबूत जूते पहनें, तथा पेड़ों के नीचे वाहन पार्क न करें। बिजली चमकने पर टीवी एंटीना, वॉटर मोटर या चार्जिंग वायर को छूने से बचें। स्थानीय हेल्पलाइन नंबर नोट करें और अफवाहों से नहीं, केवल आधिकारिक अपडेट से फैसला लें।
यात्रा और सड़क सुरक्षा
यात्रा करने वालों के लिए आंधी-बारिश के घंटे सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते हैं। अगर संभव हो तो गैर-जरूरी सफर टाल दें, खासकर रात के समय, क्योंकि तेज़ बारिश में गड्ढे और पानी भरे रास्ते दिखते नहीं। बाइक या स्कूटर से निकलना पड़े तो स्पीड कम रखें और ओवरटेक से बचें; हवा के झोंके संतुलन बिगाड़ सकते हैं। कार चला रहे हैं तो हेडलाइट ऑन रखें, वाइपर और टायर की ग्रिप पहले ही जांच लें, और अंडरपास या बहते पानी वाले रास्ते में कभी भी गाड़ी न उतारें। साथ में पानी, छोटा टूल-किट, टॉर्च और चार्जर रखें, ताकि फंसने पर मदद मिल सके। ट्रेन, फ्लाइट या बस यात्रियों को देरी हो सकती है, इसलिए लाइव अपडेट और ट्रैफिक अलर्ट देखते रहें। पेड़ों, बिजली के तारों और पुराने होर्डिंग के पास रुकना जोखिम है; सुरक्षित, मजबूत इमारत के भीतर शेल्टर लें। अगर प्रशासन सड़क बंद करे या रूट बदले, तो उसे गंभीरता से मानें और वैकल्पिक रास्ता अपनाएं।
तूफान के बाद की सावधानी
मौसम का दौर गुजरने के बाद भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि असली नुकसान अक्सर बाद में सामने आता है। सबसे पहले घर के आसपास गिरे तार, टूटे खंभे या लटकती टहनियां देखें और उन्हें खुद हटाने की कोशिश न करें; तुरंत बिजली विभाग या नगर निगम को सूचना दें। अगर घर में पानी घुस गया हो तो मेन स्विच बंद करके ही सफाई शुरू करें, वरना करंट लगने का खतरा रहता है। पीने के पानी को उबालें या फिल्टर करें, क्योंकि बारिश के बाद संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ती है। बच्चों को जलभराव वाले इलाकों में खेलने न दें और मच्छरों से बचाव के लिए जमा पानी निकालें। फसलों को नुकसान हुआ हो तो फोटो/वीडियो सबूत रखें, ताकि बीमा या राहत प्रक्रिया में मदद मिले। पड़ोसियों के साथ मिलकर बुजुर्गों और जरूरतमंदों की सहायता करें। वाहन या घर के टूटे हिस्सों की मरम्मत तभी कराएं जब मौसम पूरी तरह स्थिर हो और इंजीनियर/कारीगर सुरक्षित जांच कर लें।









