आज का सवाल : किस बर्तन में पानी पीने से कम गुस्सा आता है ?

Today's question

Today’s Question – हम अक्सर सुनते हैं कि पानी सिर्फ प्यास बुझाने का काम नहीं करता, बल्कि यह हमारे शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है। आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं में माना गया है कि किस बर्तन में रखा पानी पिया जा रहा है, इसका असर हमारे स्वभाव और मानसिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर तांबे, मिट्टी और चांदी के बर्तनों को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि सही बर्तन में रखा पानी शरीर की गर्मी को नियंत्रित करता है, जिससे चिड़चिड़ापन और गुस्सा कम हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से गुस्सा सीधे बर्तन पर निर्भर नहीं करता, लेकिन पानी की शुद्धता, ठंडक और उसमें मौजूद खनिज तत्व हमारे मूड पर असर डाल सकते हैं। इसलिए यह सवाल दिलचस्प है कि क्या सच में बर्तन बदलने से स्वभाव में बदलाव आ सकता है।

तांबे के बर्तन का प्रभाव

आयुर्वेद में तांबे के बर्तन को विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि तांबे के पात्र में रखा पानी शरीर के दोषों को संतुलित करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। जब शरीर संतुलित रहता है तो मानसिक स्थिति भी स्थिर रहती है। तांबे में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पानी को शुद्ध रखने में मदद करते हैं। स्वच्छ और शुद्ध पानी पीने से शरीर की गर्मी नियंत्रित रहती है, जिससे चिड़चिड़ापन कम हो सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह खाली पेट तांबे के बर्तन का पानी पीने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। हालांकि इसे रातभर ही रखना चाहिए और अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। सही मात्रा में उपयोग करने से यह आदत मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक हो सकती है।

मिट्टी के घड़े का ठंडा असर

मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और ताजा होता है। मिट्टी में सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जो पानी को धीरे-धीरे ठंडा करते हैं और उसे प्राकृतिक स्वाद देते हैं। गर्मियों में मिट्टी के बर्तन का पानी पीने से शरीर की आंतरिक गर्मी कम होती है। जब शरीर ठंडा और संतुलित रहता है तो गुस्सा और बेचैनी कम महसूस हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग मिट्टी के घड़े का पानी पीना पसंद करते हैं क्योंकि यह फ्रिज के पानी की तरह अचानक ठंडा नहीं होता। इससे गला भी सुरक्षित रहता है और पाचन बेहतर होता है। मानसिक रूप से भी ठंडक का एहसास तनाव को कम करने में मदद करता है। इसलिए कई लोग मानते हैं कि मिट्टी के घड़े का पानी स्वभाव को शांत रखने में सहायक हो सकता है।

क्या चांदी या स्टील का पानी भी असर डालता है?

चांदी के बर्तन को शुद्धता और शीतलता का प्रतीक माना जाता है। आयुर्वेद में चांदी को ठंडी तासीर वाला धातु कहा गया है। इसमें रखा पानी शरीर को ठंडक देता है और ऊर्जा संतुलित करता है। वहीं स्टील का बर्तन आजकल सबसे आम है, जो सुरक्षित और टिकाऊ होता है। हालांकि स्टील का पानी तांबे या मिट्टी जैसा विशेष प्रभाव नहीं देता, लेकिन यह स्वच्छता बनाए रखता है। गुस्सा कम होने का संबंध अधिकतर मानसिक और भावनात्मक कारणों से होता है। यदि पानी स्वच्छ और सही तापमान का हो तो वह शरीर को आराम देता है। इसलिए चांदी, स्टील या किसी भी साफ बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बशर्ते उसे सही तरीके से उपयोग किया जाए।

निष्कर्ष : गुस्सा कम करने का असली तरीका

असल में गुस्सा केवल बर्तन बदलने से पूरी तरह नियंत्रित नहीं होता। यह हमारी जीवनशैली, सोच, खानपान और तनाव के स्तर पर निर्भर करता है। तांबे या मिट्टी के बर्तन का पानी शरीर की गर्मी कम कर सकता है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से स्वभाव शांत हो सकता है। लेकिन इसके साथ पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है। ध्यान और योग जैसी आदतें मानसिक संतुलन बनाए रखने में अधिक प्रभावी होती हैं। इसलिए यदि आप गुस्सा कम करना चाहते हैं तो साफ और ठंडा पानी पीने की आदत जरूर अपनाएं, लेकिन साथ ही अपने मन को शांत रखने के लिए सकारात्मक सोच और स्वस्थ दिनचर्या भी अपनाएं।

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